लता मंगेशकर बनारस के इस शक्स को मानती थी अपना बेटा,जाते समय नाम कर गयी करोड़ो की दौलत

लता मंगेशकर बनारस के इस शक्स को मानती थी अपना बेटा,जाते समय नाम कर गयी करोड़ो की दौलत

मित्रों जैसा की आप सभी भलीभांति अवगत ही होगे कि फिल्म जगत की कई महान हस्तियों ने इस साल दुनिया को अलविदा कह दिया है। जहां साल 2021 में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के निधन से पूरा बॉलीवुड घमगीन था। वहीं साल 2022 में देश की मशहूर गायिका व स्वरों की मलिका लता मंगेशकर का निधन हो गया है। उनके निधन से पूरा बॉलीवुड इंडस्ट्री सक्ते में आ गया है। वहीं मिली जानकारी के मुताबिक आज एक ऐसे शख्स के संबंध में बताने जा रहे है जिनकों लता मंगेशर अपना बेटा मानती थी। अंतिम समय में उस सख्श को दे गई करोड़ों की सम्पत्ति। खबर विस्तार से जानने के लिये इस पोस्ट के अंत तक बने रहे।

दरअसल स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी का बनारस से कला और संस्कृति का नाता था। वह अपने जीवन काल में एक ही बार बनारस आ सकी थी। लता मंगेशकर जी को बनारसी साड़ियां पहली पसंद हुआ करती थीं। वह यहां के साड़ी निर्माता व व्यवसायी सगे भाइयों अरमान और रिजवान के यहां की बनी हुई साड़ियां ही पहनती थीं। इस बीच उनके परिवार में ऐसा खास रिश्ता बन गया कि दोनों भाई लता जी को मां कहते थे और वह भी उन्हें अपना बेटा मानती थीं। अक्सर पूरे परिवार से उनकी बातचीत होती रहती थी।

तीज-त्योहारों पर वह उन्हें और उनके परिवार के लोगों को कपड़े उपहार भेजती रहती थीं। वहीं उनके स्वास्थ्य के लिए अरमान ने बीती 20 जनवरी को श्री काशी विश्वनाथ धाम में उनके नाम से बाबा का अभिषेक करवाया था। उनके निधन की खबर सुनने के बाद पूरा परिवार शोकाकुल हो गया था। उनके व्यक्तिगत सहायक महेश राठोर उनके परिवार के अन्य सदस्यों और भाई हृदय मंगेशकर के साथ काशी यात्रा पर आए थे। तब लता दीदी के लिए साड़ियां खरीदने के लिए वह गौरीगंज स्थित उनकी दुकान पर पहुंचे। उसी समय उनकी पसंद जानने के लिए अरमान से मोबाइल फोन से लता जी से बात कराई थी।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि एक महीने के बाद वह साड़ियां लेकर मुंबई स्थित उनके घर प्रभुकुंज अपार्टमेंट पहुंच गए। ऐसा बताया जाता है कि बातचीत के दौरान उन्हें लता दीदी के स्नेह में मां की छवि और सरलता नजर आई और भावावेश में उन्हें मां बोल दिया। फिर तो मां-बेटे का यह रिश्ता स्थायी बन गया। इसके बाद हर महीने और कभी-कभी हफ्ते में उनसे बात हो जाती थी। लेकिन दोनों भाइयों ने लता जी के दिए गए चेकों को कैश नहीं कराया। वह लता मां से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सभी चेक को लेमिनेशन कराकर सुरक्षित रखा हुआ है और अब वह उसे एक यादगार के तौर पर संजोकर रख लिया। इन सालों में लगभग 100 से ज्यादा साड़ियां दोनों भाइयों ने लता जी को भेज चुके हैं।

उस समय के दौरान लता जी की तबीयत ठीक नहीं थी। लता जी को नववर्ष की शुभकामना देने के लिए अरमान ने उनको फोन किया था। उन्होंने भी पूरे परिवार को शुभकामना दी। जब उनसे उनकी सेहत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि ठीक नहीं है लेकिन अब पहले से सुधार है। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्या प्रतिक्रियायें है। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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