RTI : बिलकिस के बला*त्का’रियों के अलावा और कितनों को निर्दोष बताकर छोड़ चुकी है सरकार? नहीं मिला जवाब

RTI : बिलकिस के बला*त्का’रियों के अलावा और कितनों को निर्दोष बताकर छोड़ चुकी है सरकार? नहीं मिला जवाब

महिति अधि’कार पहल के लिए काम करने वाली पंक्ति जोग अब इस फ़ैसले के खि’लाफ़ आगे अपील करेंगीं. जोक ने द वीक से कहा कि ये हास्यास्पद है और गृह विभाग से इसकी उम्मीद नहीं थी।

दरअसल पंक्ति ने पिछले पांच साल के दौरान छूट के नाम पर दो’षियों के नामों पर विचार करने के लिए गठित समितियों के संदर्भ की शर्तों की प्रामाणित प्रतियां मांगी थी.

जोग ने पिछले पांच साल में रिहा किए गए दो-षियों की संख्या, तारीख़ों के साथ छूट किस आधार पर दी गई, ये जानने की मांग की थी. जोग ने कहाकि उन्हें इस मामले में कोई पारदर्शिता नहीं मिली और इसलिए उन्होंने ये आवेदन दायर किया था.

वहीं बिलकिस बानो के दो’षियों ने सु्प्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि समय से पहले उनकी रिहाई एकदम सही है. गुजरात सरकार ने ‘समय से पहले रिहाई’ से जुड़े पूरे नियमों का पालन करते हुए उन्हें रिहा किया है. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कहा था कि उनकी रिहाई के लिए इससे जुड़े 1992 के नियम लागू होंगे।

गुजरात की बिलकिस बानो केस 2002 दंगों का है. तब पांच महीने की ग’र्भ’वती बिलकिस बानो के साथ गैं’गरे’प किया गया था. उनके परिवार के 7 सदस्यों की ह*त्या भी कर दी गई थी.

इस मामले में 21 जनवरी 2008 को मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 11 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उ’म्रकै’द की सज़ा सुनाई थी. जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था. लेकिन गुजरात सरकार ने माफ़ी नीति के आधार पर इस साल 15 अगस्त को इन 11 दो-षियों को समय से पहले रिहा कर दिया था।

 

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